नई दिल्ली, 19 सितम्बर 2025 — भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के बैंकों को सुझाव दिया है कि वे आम ग्राहकों पर लगने वाले रिटेल चार्जेज़ को घटाएँ। इसमें डेबिट कार्ड ट्रांज़ैक्शन फीस, न्यूनतम बैलेंस उल्लंघन शुल्क और लेट पेमेंट चार्जेज़ जैसे शुल्क शामिल हैं।
गरीब और मध्यमवर्गीय ग्राहकों पर फ़ोकस
RBI का मानना है कि छोटे उपभोक्ताओं और निम्न आय वर्ग के ग्राहकों को अक्सर इन चार्जेज़ का सामना करना पड़ता है। इन शुल्कों को कम करने से बैंकिंग सेवाओं की पहुँच और उपयोगिता बढ़ेगी।
क्या असर होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से:
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ग्रामीण और छोटे शहरों में बैंकिंग अपनाने की दर बढ़ सकती है।
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डिजिटल लेन-देनों में भी तेजी आ सकती है।
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बैंकों को ग्राहक-अनुकूल नीतियों पर ज़ोर देना पड़ेगा।
बैंकों की प्रतिक्रिया
हालांकि बैंकों का कहना है कि ऐसे शुल्क उनके लिए सेवा की लागत (service cost) को कवर करने में मदद करते हैं। लेकिन RBI ने साफ किया है कि ग्राहक सुविधा को प्राथमिकता देना ज़रूरी है।
आगे की राह
उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कई बैंक डेबिट कार्ड, UPI और बेसिक सेवाओं पर लगने वाले चार्जेज़ घटाने की घोषणा कर सकते हैं।
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