नई दिल्ली, 18 सितंबर 2025 — राष्ट्रीय बैंकिग़ संस्थान (Reserve Bank of India, RBI) ने निवेशकों की सुरक्षा और डिजिटल पेमेंट्स की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए Payment Aggregators (PAs) के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों के अनुसार अब:
-
Payment Aggregators को पूर्ण KYC (Know Your Customer) करना ज़रूरी है। The Economic Times
-
Rent (मकान किराया) का पेमेंट अब क्रेडिट कार्ड से उन प्लेटफार्मों पर नहीं होगा जो किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच सीधे लेन-देने का काम करते हैं, जब मकान मालिक (नियुक्त merchant) नहीं हो। Business Standard+1
-
इसके अलावा, PAs को यह सुनिश्चित करना होगा कि फ़ंड्स सिर्फ उन merchants को जाएँ जिनके साथ उनका कॉन्ट्रैक्चुअल संबंध है। Business Standard+1
🔍 असर क्या होगा?
-
Fintech ऐप्स और aggregators को अपने बिज़नेस मॉडल में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे। जो landlords formal merchant नहीं हैं, उनसे किराया लेने का ऑप्शन बंद हो जाएगा। Business Standard+1
-
Users (उपभोक्ता) को अब rent payments करवाने में आसान सुविधाएँ नहीं मिलेंगी जैसे पहले थीं; उन्हें बैंक ट्रांसफर, UPI या अन्य माध्यमों से किराया देना पड़ेगा। Business Standard
-
aggregators के लिए compliance cost बढ़ेगा क्योंकि KYC प्रक्रियाएं सख्त होंगी और merchant onboarding की प्रक्रिया ज़्यादा formal होगी।
Also Read
- NBFCs को बढ़ती Delinquencies का सामना, Growth Momentum बना हुआ है
- Canara Bank के शेयरों में उछाल, HDFC और ICICI Bank पर Pressure
- Muthoot Finance ने 600 Million Dollar International Bonds से उठाए Funds
- Life Insurance Policy Sales में गिरावट, LIC और Private Companies पर दबाव
- Bitcoin फिर गिरा, Altcoins भी Pressure में; Crypto Investors परेशान




